हज़रत अली की शहादत पर उठा ताबूत, हर आंख हुई नम

बरेली/सेंथल। हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत पर फर्ज की नमाज़ के बाद छीपी टोला स्थित दीवानखाने में एक मजलिस का आयोजन कर शबीहे ताबूत निकाला गया इस दौरान रोज़ेदारों द्वारा नौहा ख्वानी व मातम करते हुऐ मोहम्मद स.अ. ब. को उनके दामाद का पुरसा दिया।

इससे पहले मौलाना ने बताया कि 21 रमज़ान सन 40 हिजरी को मस्जिद-ए-कूफा में इमाम हज़रत अली की शहादत हुयी। हजरत अली की शहादत उस वक़्त हुई जब वे सुबह की नमाज़ पढ़ा रहे थे ज़ालिम इब्ने मुल्जिम ने ज़हर से बुझी तलवार से उनपर वार किया और उन्हें इतना ज़ख़्मी कर दिया की तीन दिन के बाद 21 रमजान को उन्होंने जाम-ए-शहादत नोश फरमाया।

कस्बा सेथल में भी हज़रत अली की शहादत को याद करते हुए शिया हल्के में तीन दिन तक ग़म का माहौल रहा। लोगों ने रंग- बिरगें कपड़ो को बदलकर काले और सादे कपड़ो को पहन लिया। साथ ही मजलिसों का सिलसिला शुरू हुआ और हर घर से या अली मौला की सदाएं बुलंद होने लगी। इस कड़ी में मौहल्ला पछाया के इमामबाड़ा जुल्फिकार हस्नैन में मजलिस को मौलाना गज़नफर अली ने खिताब किया। मजलिस के बाद ताबूत की ज़ियारत कराई गई। इमामबाड़ा कला में हुई मजलिस को मौलाना तंज़ीम हुसैन ज़ैदी ने ख़िताब करते हुए कहा कि

हजरत अली का पूरा जीवन गरीबों, यतीमों, विधवाओं व मज़लूमों के लिए समर्पित था। वह यतीमो की इस तरह से मदद करते थे कि उन्हें पता भी नहीं चलता था कि मदद करने वाला कौन है। हजरत अली ने इस्लाम की हिफाज़त के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।

मौला हज़रत अली के जैसा कोई बहादुर इंसान दूसरा न कोई था और न कोई होगा, बड़े से बड़ा ताकतवर आपके सामने टिक नहीं पाता था। इस लिए दुश्मने इस्लाम अब्दुल रहमान इब्ने मुलजिम नाम के शख्स ने ने 19 रमजान की सुबह मस्जिदे कूफा में नमाजे फज्र के दौरान सजदे की हालत में आप पर हमला किया, जिससे आप बुरी तरह जख्मी हो गए और 21 रमजान को इस दुनिया से रुखसत हो गए। मौला अली की शहादत को सुनकर इमामबाड़े में मौजूद लोग रोने लगे। मजलिस के बाद ताबूत का जुलूस उठा जो अपने निशचित मार्गों से होता हुआ मौहल्ला चौधरी के इमामबाड़ा नन्नी बीबी में जाकर समाप्त हुआ। मोहल्ला चौधरी की मस्जिद और हैदरी मस्जिद में भी ताबूत की ज़ियारत कराई गई। खुर्रम ज़ैदी, अली सरदार, राशिद जैदी,अयाज़ हैदर , एहसन रज़ा,अरबाब हुसैन, मुज़य्यन हुसैन आदि के यहां जुलूस का स्वागत किया गया। जिसमें जरीफ हुसैन, मोहसिन रजा, मेहदी रज़ा,कायम रज़ा, शहीम हुसैन ने मर्सिया पढ़ीं। जुलूस में एसएसआई मुंशीलाल रावत, चौकी इंचार्ज मुकेश कुमार त्यागी भारी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।

सबील करते अकीदतमंद

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