शानो-शौकत के साथ मनाया गया जश्न ए कुरान पाक

नवाबगंज (बरेली) :- कस्बे की मस्जिद में जश्न ए कुरान पाक मनाया गया। इसमें ज्यादा से ज्यादा तादाद में लोगों ने शिरकत की।

नई बस्ती .स्थित साबरी मस्जिद में इमाम मुफ़्ती इरशाद अहमद कदीरी ने कुरान पाक मुकम्मल किया। मुबारक मौके पर लोगों ने मिठाइयां बांटी और मस्जिदों में रंग बिरंगी सजावट कर लोगों को आकर्षित किया।

ईशा की नमाज के बाद 20 रकत की तराबी पढ़ाने व कुरान पाक सुनने वाले इमाम को कमेटी की तरफ से नजराना पेश किया। कुरान पाक मुकम्मल होने के बाद जश्न ए कुरान का आगाज हुआ। प्रोग्राम का आगाज नातों मनकवत से शुरू हुआ। जिसमें हाफिज सुलेमान और ज़नाब ताजुद्दीन अंसारी ने अपनी नातों सलाम से प्रोग्राम का शमां बांधा।उसके बाद मौलाना नईम साहब ने तकरीर करते हुए रमज़ान में तराबीह की फ़ज़ीलत ब्यान की और बताया कि

तमाम आसमानी किताबों के हाफ़िज़ सिर्फ अंबिया रहे जबकि क़ुरान ए पाक स0 अ0 व0 के उम्मतियों के सीने में महफूज़ है इसमें कोई न एक अल्फाज़ कम कर सकता है न कोई बड़ा सकता है । क़ुरान हिदायत की मुकद्दस किताब है रमजानुल मुबारक के महीने में ही कुरान हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम पर नाजिल फरमाया। कुरान मुसलमानों के लिए हिदायत की मुकद्दस किताब है।  सभी मुसलमानों को चाहिये कि सभी क़ुरान के बताए रास्ते पर चलें।”

जश्न-ए- क़ुरान में मुफ्ती इरशाद कदीरी ने बताया कि

खानदानी असर बच्चों पर पड़ता है लिहाज़ा मां बाप को चाहिए किक़ुरान और हदीस पर चलते रहें जिससे उनके बच्चें भी उस पर अमल करेंगे|

 मौलाना जाबिर अशर्फ़ी ने क़ुरान की अजमत का बयान किया कहा कि कुरान को अपने घर की जीनत न बनाओ, बल्कि इसे पढ़ो और अपने मसलों का हल निकालो। कहा जब-जब कौम कुरान से दूर हुई उस पर अजाब और परेशानियां आईं।

 देश में अमन चयन से रहने के लिए दुआएं मांगी। इस मौके पर मस्जिद के मुताबल्ली इकवाल, हाज़ी कल्लू, हाज़ी डॉ अकरम, डॉ सगीर , रियाजुद्दीन, मो० आसिफ़ पिंटू , शफीक अहमद, मो0 ताहिर , हारून , फ़िरोज़ अख्तर आदि मौजूद रहे।

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