जानें बरेली में ईद की नमाज़ का टाइम और नमाज़ से पहले अदा करें सदक़ा-ए-फित्र

बरेली। रमज़ान का पाक मुक़द्दस महीना विदा हो चला है।तीस दिन भूखे, प्यासे रहकर रोज़े रखने और अल्लाह की इबादत करने वालों को अल्लाह ने ईद की खुशियों की सौगात दी है। ईद का त्योहार हमें पैगाम देता है कि सब एक दूसरे की खुशियों में शामिल हों, ईद की खुशियां सबके लिए हैं हर अमीर और गरीब सबके लिए। कोई गरीब ईद की खुशियों से महरूम न रहे इसके लिए अल्लाह ने जकात, और सदक़ा ए फित्र देना वाजिब करार दिया है। गरीबों, मिसकीनों को इतना माल दे दिया जाए कि वे ईद की खुशियों से महरूम न रहें। पैगम्बर हजरत मोहम्मद स.अ. ब. ने ‘सदका-ए-फित्र’ को ‘जकातुल फित्र’ कहा है। यह (दान) रमजान के रोजे पूरे होने के बाद दिया जाता है। ‘जकातुल फित्र’ यह सदका रोजे के लिए बेहयाई और बेकार बातों से पाक होने के लिए गरीबों को दिया जाता है।
रोजे की हालत में इंसान से कुछ भूल-चूक हो जाती है। जबान और निगाह से गलती हो जाती है। इन्हें माफ कराने के लिए सदका दिया जाता है। हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर रजि. बयान फरमाते हैं कि

अल्लाह के रसूल ने रमजान का सदका-ए-फित्र एक साअ (1700 ग्राम के लगभग) खजूर या जौ देना हर मुसलमान पर फर्ज है। चाहे वह आजाद हो या गुलाम, मर्द हो या औरत। जकात माल पर फर्ज है, वह माल को पाक करती है और सदका-ए-फित्र इंसान पर वाजिब है। यह इंसान को गुनाहों की गंदगी से पाक करता है।

वह शख्स जिस पर जकात फर्ज है उस पर फित्र वाजिब है। यह फकीरों, मिसकीनों (असहाय) या मोहताजों को देना बेहतर है। ईद का चांद देखते ही फित्र वाजिब हो जाता है। ईद की नमाज पढ़ने से पहले इसे अदा कर देना चाहिए। अगर किसी वजह से ईद की नमाज के बाद दें तो भी हर्ज नहीं है। लेकिन कोशिश की जाए पहले दें।

फित्र में क्या देना चाहिए

हर वह चीज जो गिजा (खाद्य सामग्री) के तौर पर इस्तेमाल की जाती है। गेहूं, अनाज, खजूर आदि से भी सदका-ए-फित्र अदा हो जाता है। वैसे नकद रकम भी दी जा सकती है। उल्मा-ए-दीन ने इसकी मात्रा 2 किलो 45 ग्राम गेहूं के बराबर बताई है। इतना अनाज या इसकी कीमत की रकम अदा करने से यह सदका अदा हो जाता है।

बरेली शहर में कहां कब होगी ईद की नमाज़

ईदगाह बाक़र गंज में सुबह 10.30 और दरगाह आला हज़रत पर सबसे आखिर में 11.00 बजे ईद उल फित्र की नमाज़ की अदा होगी। दरगाह आला हजरत से जुड़े नासिर कुरैशी ने बताया कि

ईद उल फितर मुख्य नमाज़ बाक़र गंज की ईदगाह में सुबह 10.30 बजे होगी। वहीं सबसे आखिर में दरगाह आला हज़रत स्थित रज़ा मस्जिद में 11.00 बजे ,किला की शाही जामा मस्जिद में 9.30 बजे नमाज़ अदा होगी।सबसे पहले सुबह 6.00 बजे शहर की साहूकारा की टुंडे मौलाना की मस्जिद में नमाज़ अदा की जाएगी।

यह है शहर की दूसरी मस्जिदों में ईद की नमाज़ अदा करने का टाइम…

6:30 बजे किला की अनार वाली मस्जिद।

7:00 बजे दरगाह शाह शराफत मियां, किला थाने वाली मस्जिद।

9:30 बजे ख़ानक़ाह ए नियाजिया।

9:00 बजे दरगाह वली मियां बाजार संदल खान।

10:00 बजे दरगाह नासिर मियां नोमहला मस्जिद सिविल लाइन्स।

10:30 बजे दरगाह शाहदाना वली।

7:30 बजे चक महमूद की हाफिज़ इस्लाम खान मस्जिद।

8:00 बजे जसौली की पीराशाह मस्जिद, कोट पुराना शहर की चिराग अली शाह मस्जिद, फ़ाइक इन्क्लेव की बीबी फ़ातिमा मस्जिद, जगत पुर की गार्डन सिटी मस्जिद, काज़ी टोला पुराना शहर की इमाम बाड़े वाली मस्जिद।

8:15 बजे जसौली की आखुम जादों मस्जिद, ठिरिया निजावत खान की नूरी मस्जिद।

8:30 खंनु मोहल्ला की अबु बकर मस्जिद व सय्यद क़ासिम अली मस्जिद, बिहारीपुर की तुल्लन कसेरा मस्जिद, न्यू कटघर की सकलैनी मस्जिद, सैलानी की बारादरी मस्जिद, मलूकपुर जुग्गन की गली की शेर खान मस्जिद, किशोर बाजार बिहारीपुर की बन्नी आपा मस्जिद, डोमनी मस्जिद।

9:00 बजे बिहारीपुर की बीबी जी मस्जिद, सैलानी की हबीबिया मस्जिद, आज़म नगर की हरी मस्जिद,कटघर की हरे मीनार मस्जिद, कचहरी वाली मस्जिद,गढ़ैया की नूरी मस्जिद।

9:30 बजे मलूकरपुर की मुफ़्ती ए आज़म मस्जिद।

10:30 बजे घेर जाफ़र खान की मिर्ज़ाई मस्जिद, गुलाब नगर की घोसियो वाली मस्जिद।

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