पीराने कलियर के सज्जादानशीं की शान में गुस्ताखी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

बरेली। दरगाह हज़रत मखदूम साबिर कलियारी र.अ. और उनके कुनबे की शान में सूफी मोहसिन साबरी नाम के शख्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। जिससे साबरी सिलसिले से जुड़े लाखों मुरीदों में भारी नाराज़गी है। बरेली में भी साबरी सिलसिले से जुड़े लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।

नदीम कुरैशी, नायाब सदर साबरी एक्शन कमेटी

साबरी एक्शन कमेटी नायब सदर नदीम कुरैशी ने कड़ा ऐतराज़ करते हुए सवाल किया कि सूफी मोहसीन साबरी, सबसे पहले यह बताएं कि उन्होंने गुंडा किस्म के लोग किसे कहा,अगर उनका इशहरा सज्जादगान की तरफ है, तो वह सार्वजनिक तौर पर माफी मांगे। पूरी दुनिया जानती है दरगाह साबिर पाक के सज्जादा नशीन, शाह मंसूर एज़ाज़ साबरी और नयाब सज्जादा नशीन अली अली शाह मंजर एजाज़ साबरी है। इनकी इजाज़त से दरगाह शरीफ पर प्रोग्राम होते है। शाह मंसूर एज़ाज़ साबरी, मंसूर मियाँ ने दुनिया के हर कोने के लोगो को साबरी सिलसिले से जोड़ा है। आज दुनियाभर में उनके लाखों मुरीदीन है उर्से साबिर पाक में लाखों की तादाद में जो ज़ायरीन हाज़री देने दरगाह शरीफ पर आते है,वह सज्जादा नशीन मंसूर मियाँ की दाबत पर आते हैं। सूफी मोहसीन साबरी ने, सज्जादगान के लिए गुंडे शब्द का इस्तेमाल कर के लाखों मुरीदों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मोहसिन साबरी सार्वजनिक रूप से माफी नही मांगते है तो प्रशासन के उच्च अधिकारियों से मिलकर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

ठिरिया निजावत खाँ में सज्जादा नशीन के ख़लीफ़ा सूफी माहिर मियां साबरी ने खानकाहे महिरया साबरिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शाह मंजूर एजाज कुद्दुसी साहब ने वक़्फ़ के नियमों पालन करते हुए नई प्रथा को न पड़ने पर जब एतराज जताया तो मोहसिन नामक व्यक्ति ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जिसकी हम मज़म्मत करते हैं, जबकि वक़्फ़ बोर्ड ने यह तय किया हैं कि दरगाह पर महफ़िलें समा कव्वाली पड़ी जा सकती हैं, फिर मंगल के रोज़ कव्वाली कराने का क्या मक़सद था? साबिर पाक की दरगाह से हमेशा शांति सोहार्द का संदेश पूरी दुनिया मे दिया जाता है। आपकी दरगाह से हर मज़हब का आदमी दरगाह पर पूरी आस्था श्रद्धा से हाज़री देता है ऐसी दरगाह जहाँ पर हमेशा अमन की बात होती हैं ऐसे आसामाजिक तत्व बयान जारी करके माहौल को खराब करने की कोशिश करते हैं। सूफी वसीम मियां साबरी ने विरोध जताते हुये कहा कि साबरी दर का हर वो शक्श हमारे लिये अहम जो साबिर पाक से निसबत रखता हैं, सज्जादा नशीन के ख़िलाफ़ की गई गुस्ताखी को बर्दाश्त नही किया जाएगा, मोहसिन नामक व्यक्ति के ख़िलाफ़ कानून कार्यवाही की जाये।

विरोध करने वालो में शाहिद रज़ा नूरी, मेराज साबरी, इस्लाम साबरी, काशिफ़ साबरी, इमरान,अनीस साबरी, बाबु चच्चा,फ़ैज़ी चिश्ती, सोहेल चिश्ती, ज़ैद अली, दिलशाद साबरी, अतीक साबरी, सलीम साबरी, मुन्ना साबरी, रेहान साबरी, फहीम साबरी, नईम साबरी, मो एराज़ साबरी, नसीम साबरी, रिज़वान साबरी, सूफ़ी माहिर मियां साबरी, आशिक, मोबिन, फैज़ान, अकरम, मो शान, हाफिज जीशान, साजिद, शादाब,यासीन, ताहिर, तौसीफ, इसरार, नदीम, बिलाल, मुनाजिर, मासूम, शारुख, आज़ाद, जीशान आदि शामिल रहे।

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