पाबंदियों और अत्याचारों के बाद भी डट कर खड़ा है ईरान : प्रो. हाश्मी

इस्लामी गणराज्य ईरान ने हिजाब के साथ अपने देश की महिलाओं को पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की है। यह कहना है प्रोफेसर मोहम्मद हुसैन हाशमी और प्रोफेसर खानम हिजाजी का। भारतीय प्रतिनिधिमंडल से मुकालात के दौरान प्रोफेसर हाशमी और प्रोफेसर हिजाजी ने अपने देश की ईरान का संस्कृति विभाग के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इस समय हिंदुस्तान सहित 65 देशों में कला-संस्कृति के संबंधों को मजबूत बनाने के लिए यह ईरान का संस्कृति विभाग कार्य कर रहा है, जिसके लिए ईरान कुल 81 कल्चर हाउस अपने कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। प्रोफेसर हाशमी ने कहा, हिंदुस्तान में इस समय दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद में कल्चर सेंटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

इसके आलावा उन्होंने इस्लामी ईरानी गणराज्य की क्रान्ति पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि सारी पाबंदियों और अत्याचारों के बावजूद ईरान आज इस्लाम की दुश्मन ताकतों के सामने मजबूती के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा की ईरानी सरकार की तरफ से इस्लामी कानूनों को लागू करने की पूरी-पूरी कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर आज अमेरिका ईरान का विरोधी है, तो सिर्फ इसलिए की गणराज्य ईरान नहीं बल्कि लोकतांत्रिक इस्लामी ईरान हमारा संविधान है। उन्होंने इसराइल की ओर से फिलिस्तीन पर किए जाने वाले अत्याचारों का भी वर्णन किया और कहा ईरान हमेशा पीड़ितों और असहायों की सहायता करेगा।

मुलाकात के दौरान मौजूद प्रोफेसर खानम हिजाजी ने कहा कि औरतों के संबंध से दो दृष्टिकोण थे- एक प्राचीन वादी कि औरतें घर में रहकर बच्चों और पति की सेवा करें और समाज के मामलों में हस्तक्षेप ना करें, इसके उलट दूसरा दृष्टिकोण पाश्चात्य संस्कृति वाला था जिसने महिला आंदोलन की शुरुआत की जिसका कहना था कि  औरतों को पूरी स्वतंत्रता है कि वह सामाजिक और अन्य क्षेत्रों में भाग लें और घर को छोड़ दें और समाज सेवा करने के लिए आजादी हासिल करें। इस दृष्टिकोण ने  समाज में अश्लीलता और कुसंस्कृति फैला दी। उन्होंने कहा कि रुढ़िवादी पुरानी सोच वाले कहते थे कि अगर औरतें घर से बाहर जायेंगी तो परिवार की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाएगी जबकि पाश्चात्य दृष्टिकोण वालों का मानना है कि अगर औरतें घर में रहेंगी तो उनकी सामाजिक भूमिका समाप्त हो जाएगी।

प्रोफेसर हिजाजी ने कहा कि इस्लामी क्रांति के बाद यहां एक तीसरा दृष्टिकोण पेश किया गया और यह दृष्टिकोण है कि जो न तो पाश्चात्य पसंद है और ना रूढ़िवादी बल्कि इसमें औरतें अपनी सभ्यता संस्कृति के साथ-साथ सामाजिक सेवाओं में भी भाग ले रही हैं। उन्होंने कहा कि मैं क्या कुछ कहूं आप लोगों ने खुद देखा होगा कि आज यहां की औरतें राजनीतिक सामाजिक शैक्षिक सेवाएं अंजाम दे रही हैं। उन्होंने कहा कि इन सेवाओं के बावजूद ईरान में औरतें हिजाब में रहती हैं,और घर की जिम्मेदारियां भी संभाले हुए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी इंकलाब इस्लामी के संस्थापक आयतुल्लाह इमाम खुमैनी रहमतुल्ला अलेह और रहबर आयतुल्लाह खामनाई का ऐलान है कि औरतों की सामाजिक मामलों में भागीदारी आवश्यक है, लेकिन औरतों का मूलभूत चरित्र मां का रोल अदा करना है।

उन्होंने कहा कि औरतों के लिए यह भी जरूरी है कि वह घरेलू जिम्मेदारियों को अंजाम दें और उसके बाद समाज में भरपूर भूमिका अदा करें उन्होंने कहा कि इमाम खुमैनी और आयतुल्लाह ख़ामेनई के दृष्टिकोण पर अमल करते हुए आज ईरान की औरतें घरेलू खिदमत के साथ-साथ सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक सेवाएं बड़े पैमाने पर अंजाम दे रही हैं। प्रतिनिधिमंडल में अधिवक्ता ए रहमान, अनुवादक डॉ. हैदर रजा, सय्यद अशरफ जैदी, सैयद जैगम मुर्तजा, अनवर अली,सैयद गजन्फर अब्बास, अशरफ अली बस्तवी, अली अब्बास नकवी, मोहम्मद इरशान सईद, हसन काज़िम आदि शामिल थे। (एजेंसी)

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