दरगाह नासिर मियां में सजी ज़िक्रे हुसैन की महफ़िल

  • मुनीब हुसैन

बरेली। नोमहला स्थित दरगाह नासिर मियां में ज़िक्रे इमाम हुसैन की महफ़िल सजाई गई। कमाल मियां साबरी ने महफ़िल को खिताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन और पंजतन-ए-पाक, अहले बैत ने सारी दुनिया को हक़ के रास्ते पर चलने की सीख दी है और हमेशा अमन का पैगाम के साथ ही सब्र करने की हिदायत दी।

दरगाह नासिर मियां के खादिम सूफी वसीम मियां साबरी नासरी ने हज़रिने महफ़िल से खिताब होते हुए कहा कि हज़रते इमाम हुसैन आली मुक़ाम ने कर्बला के मैदान पर हक़ की हिफ़ाज़त के लिये बातिलों के ख़िलाफ़ जंग लड़ी और इस्लाम मज़हब गमराही से बचाता हैं ये पैग़ाम सरेआम किया। महफ़िल में नातो मनकबत का नज़राना पेश किया गया साथ ही हज़रिने महफ़िलें ने ‘हक़ हुसैन हक़ हुसैन’ के नारे बुलन्द किये। इस मुबारक़ अवसर पर देश व आवाम की सलामती खुशहाली के लिए खुसूसी दुआ की गई। आखिर में हज़रिने महफ़िल को तबर्रुक तस्किम किया गया।

इस मौके पर बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खाँ वारसी, कमाल मियां साबरी, सूफ़ी वसीम मियां नासरी, निहाल खान, मोहसिन इरशाद, दिलशाद साबरी, कल्लन,अतीक साबरी, सूफ़ी रिज़वान, हाजी यासीन क़ुरैशी, फहीम साबरी, महमूद साबरी, मो हनीफ़, शाहिद रज़ा नूरी, अनीस पेंटर, मो. एयाज पप्पू, हाजी साकिब रज़ा खान, हाजी अब्दुल लतीफ़ क़ुरैशी, मो. अखलाक, नईम अहमद, अनीस साबरी, तौसीफ़ साबरी, रिज़वान साबरी सहित बड़ी संख्या में अक़ीदतमन्द मौजूद रहे।

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