फातिमी फूलों की महक दश्ते करबला

पीलीभीत/पूरनपुर। शहीदाने कर्बला हज़रत इमाम हुसैन र.अ. की याद में नूरी अन्जुमन मुहीबाने अहले बैत की ओर से स्टेशन रोड पर महफिले नूरे हक का आयोजन किया। महफ़िल को खिताब करते हुए सय्यद शोएब मियां ने कहा कि शहीद-ए-दीने-हक इमाम हुसैन र.अ. ने इस्लाम का परचम बुलंद किया है। उन्होंने जो कुर्बानी पेश की है वह एक मिसाल है। हम मुस्लमानो को उनके नक्शे कदम पर चलना चाहिये। हल्द्वानी से तशरीफ़ लाये मौलाना अमीरूद्दीन ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए कहा कि हुसैन ने तलबारो के बीच भी नमाज नही छोड़ी। हम लोगो के चाहिये कि जितनी भी परेशानी हो हमे नमाज को नही छोड़ना चाहिए।
मौलाना इरफानुल कादरी ने कहा कि इस्लाम एक मुकम्मल दीन है। जिंदगी गुजारने का इस में एक पूरा निजाम पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि मुहम्मद स.अ. ब. की राहनुमाई में सहाबा ने इसी निजामें जिंदगी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया। मौलाना फुरकान रजा बरेलबी ने कहा कि खुदा ने तमाम मखलूक में इंसानों को सबसे अफ़ज़ल बनाया। उसको अकल व तमीज की नेमत अता की ताकि वह अच्छाई व बुराई में फर्क कर सकें।मौलाना आमिर रजा ने कहा हुसैन ने बो कुरबानी दी जिसे मुसलमान कभी नही भूल सकता। नाजिम मिस्बाही ने कहा कि नमाज अल्लाह के रसूल की आंखों की ठंडक है। जिसने नमाज वक्त पर अदा की यानी अल्लाह के रसूल को ठंडक पहुंचाई। जिसने नमाज तर्क किया उसने अल्लाह के रसूल की आंखों को तकलीफ पहुंचाई। जलसे को खिताब करते हुए मौलाना फजले हक नूरी ने कहा कि इंसान के लिए शिक्षा बहुत जरुरी है। शायरे इस्लाम हजरत अकील सिद्दीकी हम्दो नात व मनकबत और कलाम सलाम पेश किया। सलातो सलाम के बाद मुल्क के अमनो अमन की दुआ की गई।

इस मौके पर फजले हक नूरी हाफिज नूर अहमद अजहरी, हाफिज जकी, हाफिज सलीम, हाफिज महबूब, कारी शान मोहम्मद, कारी शान, हाफिज शेर मोहम्मद, मुफ्ती नूर मोहम्मद हसनी, हाफिज सलीम, हाफिज नदीम, नवेद रजा कादरी, मीनू बरकाती, जाबेद, शाहिद हुसैन, नोमान बारसी, हसनैन रजा, बली शेर, बाजिद अली, दिलशाद, नदीम, सलमान के साथ बड़ी तादात में अकीदतमंद मौजूद रहे।

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