उर्से आला हज़रत : रूहानी इश्क़ में खिंच आया अकीदतमंदों का सैलाब

  • मुनीब हुसैन

बरेली। कुल की रस्म अदायगी के साथ आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान फ़ाज़िले बरेलवी का 100वां उर्स समाप्त हो गया। उर्स के आखिरी दिन अकीदतमंदों का सैलाब बरेली की सड़कों पर उमड़ आया। लाखों जायरीनों से बरेली की सड़कें पट गयीं। अकीदतमंदो ने अपने सुन्नियों के सरताज को खिराजे अक़ीदत पेश की। फिज़ाओ में आला हज़रत की लिखी नात ओ मनकबत गूंजने लगी। पूरा शहर रज़ा के रंग में नज़र आया।2:38 मिनट पर कुल शरीफ की रस्म के साथ 3 रोज़ा उर्स का समापन हो गया।

उर्स के आखिरी दिन दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) व सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की सदारत में दुनिया भर से आये मशहूर उलेमा, मुस्लिम स्कॉलर व शोहरा ने अपने अपने कलाम पेश किये। मेहमान-ए-खुसूसी मेहमान मारहरा शरीफ के सज्जादगान हज़रत अल्लामा सय्यद अमीन मियां, अल्लामा नजीब मियां, हज़रत आमान मियां ने सभी को सदसाला उर्स की मुबारकबाद दी।

नबीरे आला हज़रत मौलाना अरसलान रज़ा खान ने अपनी तक़रीर में कहा कि ईमान के चार हिस्से है। अल्लाह की इबादत ही सबसे बड़ा ईमान का हिस्सा है।अल्लाह और उसके रसूल के बताये रास्ते का नाम ही मसलक-ए-आला हज़रत है। उन्होंने पश्चिमी तहज़ीब को रद्द कर मदीने वाले आक़ा सल्लल्लाहु अलैहिबसल्लम के रास्ते पर चलने की ताईद की। प्रोग्राम की निज़ामत कारी यूसुफ रज़ा संभली ने की। फातिहा कारी अमीर हमज़ा, कारी अमानत रसूल और शज़रा मौलाना शीरान रज़ा खान ने पढ़ा। मुल्क में खुशहाली और तरक्की के लिए खुसूसी दुआ हज़रत मौलाना तौसीफ रज़ा खान (तौसीफ मियां) व अल्लामा अमीन मियां ने की।

इस मौके पर ख़ानक़ाह बिलग्राम शरीफ के सज्जादानशींन हज़रत सय्यद सुहैल मियां, ख़ानक़ाह तहसिनिया के सज्जादानशीन हज़रत हस्सान रज़ा खान, सय्यद आसिफ मियां, सय्यद सैफ मियां, फ़ैज़ रज़ा खान, शीरान रज़ा खान, सूफी रिज़वान नूरी, दरगाह वली के सज्जादानशींन शेख अनवर मियां, दरगाह शाहदाना वली के मुतवल्ली अब्दुल वाजिद खान आदि मौजूद रहे। उर्स की व्यवस्था राशिद अली खान, आबिद खान, हाजी जावेद खान, परवेज़ खान नूरी, शाहिद नूरी, नासिर कुरैशी, नदीम कुरैशी, अज़मल नूरी, औरंगज़ेब नूरी, ताहिर अल्वी, शारिक उल्लाह, आलेनबी, मंज़ूर खान, मुजाहिद बेग, एडवोकेट नावेद रज़ा, तारिक सईद, शान रज़ा, कामरान खान, अशमीर रज़ा, कामरान खान, हाजी अब्बास नूरी, इशरत नूरी, ज़ोहेब रज़ा, मोहसिन रज़ा,आसिम नूरी, डॉक्टर तसव्वर, डॉक्टर नाज़िम, एडवोकेट काशिफ खान,आरिफ रज़ा, अदनान रज़ा, अब्दुल वाजिद खान, हाजी शारिक, अल्लाह बख्श, यामीन नूरी, नईम नूरी, जावेद खान, अहमद उल्लाह वारसी, आसिफ रज़ा, शारिक बरकाती, यूनुस साबरी, आसिफ नूरी, सय्यद साजिद, सय्यद एजाज़, यूनुस गद्दी, सय्यद फ़रहत, नफीस खान, ज़ीशान कुरैशी, वसीम अकरम, तहसीन रज़ा, अराफात रज़ा क़ादरी, सय्यद मुदस्सिर अली, जुनैद खान, बिलाल कुरैशी आदि ने संभाली।

किताबों का हुआ विमोचन

नबीरे आला हज़रत मौलाना फ़ैज़ रज़ा की 2 किताबों का विमोचन किया गया। हज़रत मौलाना सुब्हानी मियां ने फ़ैज़ मियां को फ़ख्र-ए-शहादत की सनद सौंपी गयी।टीटीएस की युवा इकाई के मुजाहिद बेग ने हज़रत अमीन मियां साहब को शील्ड देकर सम्मानित किया।

इनामात से नवाजे गए उलेमा

स्टेज पर मौजूद उलेमा को हज़रत सुब्हानी मियां की तरफ से इनामात से नवाज़ा गया। दरगाह प्रमुख हज़रत सुब्हानी मियां ने आला हज़रत के लिए जिन उलेमा ने बेहतरीन कामों को अंजाम दिया उन 100 उलेमा को इनामात से नवाजा। मुफ़्ती हनीफ खान रज़वी को उमरा और मुफ़्ती सलीम नूरी को बगदाद का टिकट दिया गया।

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