पानी की समस्या सुलझाने में जुटे आमिर खान

अभिनेता आमिर ख़ान का नाम जनसरोकार के कामों से अक्सर जोड़ा जाता है. ऐसा उनकी फ़िल्मों, टीवी प्रोग्राम या फिर सीधे तौर पर लोगों के साथ काम करने के कारण होता है. जब आमिर ख़ान टीवी शो ‘सत्यमेव जयते’ में आए तो देश में कई बुनियादी समस्याओं पर रचनात्मक बहस शुरू हुई थी. अब प्रतीक्षा थी कि ‘सत्यमेव जयते’ का चौथा सीज़न भी जल्द ही सामने आएगा.इस प्रतीक्षा के बीच आमिर ख़ान ने अपने साथी सत्यजीत भटकल के साथ मिलकर महाराष्ट्र के सूखेग्रस्त गांवों में काम करना शुरू किया है.
 आमिर ख़ान ने  कहा, “मैं और सत्यजीत चौथे सीज़न के बारे में सोच रहे थे. बहुत विचार-विमर्श हुआ. ‘सत्यमेव जयते’ के हर एपिसोड के बाद हमें कई बदलाव देखने को मिले थे. किसी प्रोग्राम से ज़मीन पर बदलाव हो ये हमारे लिए प्रेरणादायी था. ऐसे में हमने सोचा कि क्यों न ज़मीन पर जाकर सीधे काम करूं. हमने पानी और महाराष्ट्र को चुना.”
  आमिर ख़ान ने बताया की ‘सत्यमेव जयते’ की पूरी टीम ने तीन साल पहले महाराष्ट्र के सूखेग्रस्त गांवों में रीसर्च की और समझने की कोशिश की कि कैसे पानी की समस्या दूर कर सकते हैं. हिवारे बाज़ार और रालेगण सिद्दि कुछ ऐसे गांव थे जहां सूखे के बावजूद पानी की समस्या नहीं होती है.
आमिर ने इसीलिए ‘सत्यमेव जायते वाटर कप’ प्रतियोगिता का आयोजन किया. इस प्रतियोगिता में पूरा गांव मिलकर मॉनसून से पहले श्रमदान कर अप्रैल और मई के महीने के 6 हफ़्ते तक जल प्रबंधन का काम करता है जिससे मॉनसून में जल संरक्षण किया जा सके. प्रतियोगिता से पहले हर गांव के कुछ लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है जो ग्रामीणों का नेतृत्व करता है.
 बेहतरीन काम करने वाले तीन गांव को ‘सत्यमेव जयते वाटर कप’ और नक़द इनाम दिया जाता है. 2016 में शुरू की गई इस मुहिम में महाराष्ट्र के 116 गांवों को शामिल किया गया था. आमिर ख़ान इसे एक प्रयोग मानते हैं. 116 गांव में से क़रीब 45 गांवों को पानी की समस्या से राहत मिली. पिछले साल इस प्रतियोगिता में 1000 गांव जुड़े. 2018 में इस प्रतियोगिता में महाराष्ट्र के 75 तालुका जुड़े हैं जिसमें क़रीब 4000 गांव हैं. आमिर ख़ान चाहते हैं कि शहरी लोग भी इस काम से जुड़ें और एक दिन का श्रमदान करें. एक मई ‘श्रम दिवस’ पर वो अपील कर रहे हैं कि शहर से लोग इन गांवों में आएं और एक दिन का श्रमदान करें.

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