मस्जिद में सामूहिक नरसंहार

न्यूज़ीलैंड की अल नूर मस्जिद और लिनवुड मस्जिद में हो रही जुमा की नमाज़ में जिस आस्ट्रेलियाई आतंकवादी ब्रेंटन टैरैंट ने 50 से अधिक नमाज़ पढ़ते मुसलमानों की हत्या कर दी उसके कारणों और विचारों का अध्ययन करिएगा तो आप को यह एहसास होगा कि जिस ब्रिटिश मूल के आस्ट्रेलियाई “टेरैंट” को स्वयं आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने ‘अति दक्षिणपंथी आतंकवादी” कहा , उसी दक्षिणपंथी विचारधारा का भारत में भारतीय संस्करण “संघ” है। संघ और “ब्रेंटन टैरेंट” की विचारधारा एक ही है “दक्षिणपंथ” और इसीलिए सोशलमीडिया पर उसके द्वारा 50 से…

रक्षा मंत्रालय चौकीदार भरोसे ! सीक्रेट फाइल चोरी या चोरी को बताया सीक्रेट

भारत की चौकीदारी सिस्टम में बुनियादी कंफ्यूज़न है। चौकीदार को पता है कि उससे चौकीदारी नहीं हो सकती । अब लोगों ने उसे चौकीदार रखने की ग़लती की होती है तो वह उसे उनकी ग़लती की याद दिलाता रहता है। हर रात जागते रहो, जागते रहो चिल्लाता रहता है। ऐसी चौकीदारी भारत में हो सकती है। चैन से सोने के लिए चौकीदार रखो और वह सोने भी न दे। अलार्म लगा लो भाई। बेहतर है कि हम प्रधानमंत्री को चौकीदार समझने का बोगस मॉडल तुरंत समझ लें। जब से उन्होंने…

पोर्न फिल्मों की गिरफ्त में मुस्लिम नौजवान, साज़िश के तहत जिस्मानी और रूहानी ताकत से किया जा रहा कमज़ोर

नदीम कुरैशी  ट्रिपल एक्स फिल्में (सेक्सी, पोर्न) एक साजिश जिससे मुसलमान बे ख़बर हैं। “पोर्नग्राफी” एक बहुत पुराना नासूर है, अक्सर हम सोचते हैं कि आख़िर यह खेल शुरू कब हुआ और इसका तारीख़ी पसे मंज़र क्या है? इसके वजूद की बुनियाद क्या थी? दोस्तों! तारीख़ में सब से पहले पोर्नग्राफी बतौर हथियार सुलतान सलाउद्दीन अय्यूबी (सन 1137 से 1193) के दौरे हुक़ूमत में हुई। इसे बतौर हथियार सब से पहले सलीबी (अंग्रेज़) बादशाहों ने इस्तेमाल किया। कहानी कुछ यूँ है कि सलीबी हर मैदान में मुसलमान नौजवानों के हाथों शिकस्त…

एक सिपाही की कलम से : मनुष्य सुख की आकांक्षा छोड़े तो दुःख अपने आप समाप्त हो जायेगा

मेरे बहुत खोजने के बाद आज तक मुझे कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जिसका दुःख उसको कहीं बाहर से मिला हो या उस दुःख का कारण वो स्वयं ना हो। आज संसार में जो भी व्यक्ति दुःखी है उसने उस दुःख को स्वयं बनाया है। उस दुःख का जनक वो खुद है, क्योंकि किसी भी व्यक्ति के दुःख का कारण असीम भी है और अजीब भी है। व्यक्ति को अपने कार्य में सफलता नहीं मिलती तो दुःखी होता है। व्यक्ति बीमार होता हैं तो भी दुःखी होता है। जीवन…

अमेरिका से प्रिया की पाती : तसल्ली तो इलाहाबाद में है

आजकल आये दिन मैं अपने व्हाट्सएप्प और फेसबुक पर बदलते और चमकते प्रयागराज को देख रही हूँ. संगम नगरी इन दिनों परिवर्तन के दौर से गुजर रही है. मेरी जिंदगी के सबसे हसीन पल इसी शहर मे बीते पर इन दिनो वहाँ काफ़ी कुछ बदल रहा है, जैसे इसका नाम बदल कर प्रयागराज कर दिया गया है नाम तो बहुत अच्छा है लेकिन जो तसल्ली इलाहाबाद नाम में है वो कहीं और नहीं है. ख़ैर ये सियासी मामला है जो मेरे समझ से परे है. इस बार यहाँ अर्धकुंभ का…

जानिए रावण के 10 सिर का सच

कहते हैं रावण के दस सिर थे। क्या सचमुच यह सही है? कुछ विद्वान मानते हैं कि रावण के दस सिर नहीं थे किंतु वह दस सिर होने का भ्रम पैदा कर देता था इसी कारण लोग उसे दशानन कहते थे। कुछ विद्वानों के अनुसार रावण छह दर्शन और चारों वेदों का ज्ञाता था इसीलिए उसे दस कंठी भी कहा जाता था। दस कंठी कहे जाने के कारण प्रचलन में उसके दस सिर मान लिए गए। जैन शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण के गले में बड़ी बड़ी गोलाकार नौ…

कल तक दोस्त थे, अचानक बन गये हिंदू-मुसलमान

प्रिंस और मोहम्मद हमजा, तब से साथ पढ़ रहे हैं जब वो धर्म का मतलब भी नहीं जानते थे. लेकिन आज वो एक-दूसरे के लिए हिंदू-मुस्लिम हो गए हैं. दूसरी क्लास से ही साथ पढ़ने और खेलने-कूदने वाले प्रिंस और हमजा अचानक ही पांचवीं क्लास में अलग कर दिए गए. उन्हें बताया गया कि अब हिंदू-मुस्लिम अलग-अलग बैठेंगे. लेकिन ऐसा क्यों किया जा रहा है, ये उन्हें पता नहीं था. वो तो बस अलग हो रहे थे. जो अभी तक सिर्फ़ बच्चे थे वो हिंदू-मुस्लिम हो गए थे. लेकिन, प्रिंस…

जन्मदिन विशेष : इक सफर पर मैं रहा, मौलाना रूमी

आरिफ अंसारी रूमी के मज़ार पर ये पंक्तियां लिखी हैं ” जब में मर जाऊं तोमेरे मकबरे को ज़मीन में मत खोजना, उसे लोगों के दिलों में खोजना” । मौलाना रूमी का पूरा नाम मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी है। इनका जन्म 30 सितम्बर, 1207 (सन 604 हिजरी) को अफगानिस्तान तत्कालीन फारस के मशहूर शहर बाल्ख में हुआ था। यह फारसी साहित्य के सूफी शायर थे। जिन्होंने मसनवी में महत्वपूर्ण योगदान किया है। मौलाना रूमी के पिता शेख बहाउद्दीन अपने वक़्त के बहुत बड़े विद्वान थे जिनके उपदेश सुनने और फतवे…

बेरोजगारों का दर्द समझे सरकार

अपूर्व वाजपेयी उत्तर प्रदेश में हर भर्ती पिछले डेढ़ साल में जिस तरह से पेपर लीक या कोर्ट के चक्कर में लंबित पड़ी है, उससे साफ़ है कि सरकार में बैठे अधिकारी इन भर्तियो को लेकर संवेदनशील नही है. देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या भी सबसे ज्यादा है. हर साल लाखो की संख्या में इंटर, ग्रेजुएशन पास करने वाले छात्र जब किसी सरकारी नौकरी की लिखित परीक्षा देकर वापस अपने घर तक नही पहुँच पाते तब तक परीक्षा सम्बन्धी वेबसाइट पर…

डरी-डरी किसी कोने से झांकती हिन्दी

प्रदीप कुमार शर्मा हिन्दी को पूर्ण भावात्मक लिपि यानी भाव से परिपूर्ण कहा गया है, दुनिया मे और कोई दूसरी भाषा ऐसी नही जोकि आपकी भावनाओं को दर्शा सके। अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिन्दी की अनदेखी को रोकने के लिए 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एकमत होकर यह निर्णय लिया की हिन्दी ही भारत की राष्ट्र भाषा होगी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर 1953 से संपूर्ण…