वायु प्रदुषण का इलाज ढूंढने नैनीताल में जुटे एशिया के वैज्ञानिक

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A man wearing a mask walks on a smoggy morning in New Delhi, November 3, 2019. REUTERS/Adnan Abidi

एरीज की ओर से आयोजित कार्यशाला में पहले दिन शोधार्थियों के लिए हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) की ओर से बढ़ते वायु प्रदूषण और उससे मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर एशिया के वैज्ञानिकों की तीन दिवसीय कार्यशाला की अनौपचारिक शुरुआत बृहस्पतिवार को हो गई है। कार्यशाला में मौजूद शोधार्थियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ, इसमें वैज्ञानिकों ने शोध कार्यों में नई तकनीक के उपयोग पर जोर दिया गया।

डॉ. नाजा ने बताया कि कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ आज हुआ। आज आईआईएमटी पुणे के वैज्ञानिक डॉ. सचिन गुणे दिल्ली में तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर अपने मॉडल के माध्यम से जानकारी देंगे। जोखिया स्थित एक रिजॉर्ट में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में फ्रांस से पहुंचे वैज्ञानिक डॉ. सिल्विया बूसी ने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वह जिस विषय में शोध करते हैं, उसमें नई तकनीक का उपयोग करें। क्योंकि उन्नत तकनीक से न केवल सही डाटा प्राप्त होता है, बल्कि उसके परिणाम भी सटीक आते हैं। उन्होंने सेटेलाइट डाटा के उपयोग पर भी जोर दिया। डॉ. सिल्विया ने मूल्यांकन और मॉडलिंग के बारे में भी जानकारी दी।