गुजरात में कांग्रेस ने किया केंद्र के खिलाफ एक और ‘स्वतंत्रता आंदोलन’ का एलान

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अहमदाबाद। गुजरात में कांग्रेस के नेताओं ने शनिवार को मोदी सरकार की तुलना ब्रिटिश शासकों से की और भाजपा नीत सरकार को गद्दी से हटाने के लिए ‘‘दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’’ शुरू करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि महात्मा गांधी ने जो सपना देखा था, देश को वैसा बनाने के लिए काम करने की आवश्यकता है। कांग्रेस की गुजरात इकाई ने पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर साबरमती आश्रम से शहर के उस्मानपुरा में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा तक ‘संविधान बचाओ’ फ्लैग मार्च निकाला। इस मार्च में हजारों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। पार्टी के गुजरात प्रभारी राजीव सातव, राज्य इकाई के प्रमुख अमित चावडा और विधानसभा में विपक्ष के नेता परेश धनानी सहित कई नेता मौजूद थे। सातव ने मार्च से पहले कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भाजपा सरकार (केंद्र में) जो पिछले छह वर्षों से सत्ता में है, के कार्यकाल में देश पीछे की ओर जा रहा है।

प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, कृषि संकट सहित देश के लोगों को प्रभावित करने वाले सवालों के जवाब नहीं देते हैं। उन्होंने कहा, अपनी स्थापना दिवस पर, हम दूसरी आजादी के लिए लड़ाई शुरू करने और फिर से देश को बापू के सपनों का बनाने के लिए काम करने का संकल्प लेते हैं। सातव ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता में आने के बाद कृषि ऋण माफी का अपना वादा पूरा किया। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र में भी, जहां भाजपा अपने राजनीतिक सहयोगी शिवसेना को साथ नहीं रख सकी, हमने किसानों का दो लाख रुपये का ऋण माफ किया।

सातव ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर झूठ फैलाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, जब झूठ फैलाने की बात आती है, तो प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री को चुनौती नहीं दी जा सकती। आइए, हम देश को झूठ फैलाने वालों से बचाने का संकल्प लें। चावडा ने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक निकायों का दुरुपयोग कर रही है, लोकतंत्र के नाम पर देश को विभाजित कर रही है और लोगों के संवैधानिक अधिकारों को कुचल रही है। उन्होंने कहा, कांग्रेस ने सरकार के साथ साथ विपक्ष में भी काम किया है। लेकिन जब देश की एकता की बात आई तो पार्टी हमेशा राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठ गई। कांग्रेस नेता ने कहा, आज देश में जो कुछ भी हो रहा है, वही ब्रिटिश राज के दौरान हुआ था, जब लोगों की आवाज को हिंसा और अन्याय के जरिए दबा दिया गया था। कांग्रेस के लिए समय आ गया है कि आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू की जाए।