आधुनिक भारत में शरद पवार ही राजनीति के चाणक्य है…!

क्या कीसी बागी को दुसरी सरकार में डिप्टी सीएम बनने के बाद अपनी ही पार्टी की सरकार में भी डिप्टी सीएम बनने का राजनितिक सौभाग्य मिल सकता है….?
इसका जवाब हां है और उस खुशनशीब नेता का नाम है मराठी मानूष अजीत पवार ….!
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे समेत शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस से 36 नए विधायक अब मंत्री पद की शपथ लेकर सरकार में शामिल हो गये है.

फडणवीस सर खूजला रहे है-मेरी सरकार में भी डिप्टी, ठाकरे की सरकार में भी…..?

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनी महा अघाड़ी सरकार के गठन के करीब एक महीने बाद हास ही में पहला कैबिनेट विस्तार हो गया. इस कार्यक्रम में एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लीं.

अब ये तय हो गया की अजीत का भाजपा में जाना एक सोची समझी चाल थी जिस में कमल का फूल घिर गया…!

यह वही अजीत पवार है जिन्होने 23 नवंबर को अपनी ही पार्टी एनसीपी से से बगावत करते हुए भाजपा के देवेंद्र फडणवीस के साथ सरकार बनाई और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि कुछ ही घंटो के भीतर फडणवीस के बाद पवार ने भी त्यागपत्र दे दिया था.

कैसे शरद पवार ने भाजपा को विधानसभा भंग करने से ऐसे रोका की….?

एनसीपी में शरद पवार के बाद सबसे ज्यादा ताकतवर नेता के रूप में जब भी नाम आता है तो अजीत पवार का नाम गर्व से लिया जाता है। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति के सूरमा माने जाने वाले अजीत पवार कौन हैं? इसका जवाब शायद कीसी नेता के रबप में मिल सकता है. लेकिन लगता है की एनसीपी के महारथी शरद पवार ने भाजपा को सियासी शतरंज में परस्त करने की अपनी गहरी चला में अजीत का उपयोग किया और अजीत का बागी बन कर भाजपा में जाना, भाजपा की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना और शाम होते होते फिर से एनमसीपी में आ जाना तथा इसके साथ भाजपा की कीरकीरी होना… ये सब जो ड्रामा हुआ वह अब जाकर यह गवाही दे रहा है की किस तरह से सिनियर पवार ने भाजपा को झांसा दे कर उनके नेताओ को अपनी चाल में फसा कर महाराष्ट्र विधानसभा को भंग होने से बचाई और उद्धव को सीएम बना कर ठाकरे परिवार का ईतिहास बदलने में सही अर्थ में चाणक्य साबित हुये….!

अब ईस बात का सबूत है की आधुनिक भारत में शरद पवार ही एकमात्र राजनीति के चाणक्य है…!

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद जब भाजपा और शिवसेना में तनातनी हो गई और शिवसेना ने एनसीपी तथा कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का खाका तैयार किया तब भाजपा ने हर हाल में शिवसेना को रोकने के लिये पहले तो राष्ट्रपति शासन लगा दिया. फिर कोई विधायक खिंचे चले आते है या नहीं वह टटोला.
एनसीपी के महारथी शरद पवार घाट घाट के पानी पिये हुये मंजे ऱाजनीतिक खिलाडी है. कांग्रेस में वे पीएम पद के प्रबल दावेदार थे. उनके भतीजे और एनसीपी के नेता अजीत पवार जब बागी बन कर आधी रात भाजपा और देवेन्द्र फडणवीस के साथ मिल कर डिप्टी सीएम बने तब ही कईयो को लगा कि ये सिनियर पवार की कोई सियासी चाल हो सकती है. भाजपा के नेता तो फुले न समाये. सरकार बन गई और नई सरकार को शुभेच्छा के ट्वीट का चहकना भी सुना भारत ने.
लेकिन कुछ ही घंटो में फडणवीस फिर से पूर्व सीएम हो गये और अजीत पवार की घर वापसी हो गई. लेकिन ईतना जरूर किया शरद पवार ने की अजीत को एनसीपी के विधायक दल के नेता से दूर कर दिया उस वक्त. अजीत के साथ गये सभी विधायक बारी बारी वापिस आ गये. लोग हैरान. ये क्या हो रहा है…?
भाजपा ने कितने मनोभाव से बागी पवार की सहायता से सरकार बनाई और शिवसेना को ठेंगा दिखाया साथ कांग्रेस को भी लटकाया…..! फडणवीस भी फूले न समाये. लेकिन मौसम बदल गया की तरह पूरा सीन ही बदल गया. बागी पवार को कोइ कुछ नहीं बोला. और शरद की अगुवाई में ऐसा राजनितिक माहोल बना की भाजपा विधानससभा भंग करने की हिंमत ही नहीं जूटा पाई. शायद खुद भाजपा को भी लगा होगा कि उनके साथ कोइ छल हो गया क्या…?
कहते है न की युध्ध और प्रेम में सबकुछ जायज है. राजनीति भी कीसी युध्ध से कम नहीं. और पिछले कुछ समय से गोवा आदि राज्यो में जिस तरह से भाजपाने बहुमत न होते हुये भी सरकारे बनाई तब भारत की राजनीति में एक नये चाणक्य का उदय होने की खबर चहेते टीवी मिडिया ने खूब जोर शोर से चलाई. लेकिन जब महाराष्ट्र में भाजपा सरेआम फैल हो गई और शरद की चाल में फस गई तब चहेती मिडिया मौनी बाबा बन गई थी…!
उस वक्त यहां से इसी स्थान पर ये अंदेशा जताया गया था की भाजपा को विधानसभा भंग करने से रोकने के लिये शरद ने अजीत को बागी बना कर सामने के खेमे में भेजा और सरकार बनाने दी. ताकी भाजपा के लिये ऐसे हालात बन जाय की वह फिर विधानसभा भंग करने की हिंमत ही न कर पाये…!
आज जब अजीत पवार का सरकार मे शामिल होना और उन्हें डिप्टी सीएम बनाना अब ईस बात का सबूत है की आधुनिक भारत में शरद पवार ही एकमात्र राजनीति के चाणक्य है…! उनकी शतरंजी बाजी में भाजपा भी ऐसी फसी थी कि वह कीसी से अपनी आपबीती नहीं कह सकती….!
राजनीति में उठापठांग होती है. लेकिन महाराष्ट्र में जीस तरह शरद पवार ने भाजपा को अपनी मस्त चाल में लपेट कर अपने साथ तीन दलों की सरकार बनाई वह एक मिसाल बन सकती है. वर्ना जिसने दल से गद्दारी की हो उसे फिर से पार्टी में लेना और सरकार में डिप्टी सीएम के पद पर बिठाना ये द्रश्य देख कर देवेन्द्र फडणवीस सर खूजला रहे होंगे और सोच रहे होगे की पवारदादा, तुस्सी ग्रेट हो….जय महाराष्ट्र….!!