अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बरेली के उलेमाओं ने किया स्वागत

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  • मुनीब हुसैन

बरेली। बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का शहर के उलेमा ने स्वागत किया है। इतिहाद ए मिल्लत के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि फैसले से खुशी और मायूसी एक आम प्रक्रिया है लेकिन इतना तय हो गया कि मंदिर के नाम पर राजनिति का दौर खत्म होने के साथ मज़हब के नाम पर भी नफरतों के दौर का खात्मा हुआ है। मौलाना ने कहा कि हमारे मज़हब ने सिखाया है कि खुशी में अल्लाह के शुक्र अदा करे और मायूसी में सब्र करे। फैसले का स्वागत करते हुये तौकीर रज़ा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने जो फ़ैसला दिया हम उस का सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा कि हमने उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले से पहले एक कोशिश की थी जिस पर न्यायालय ने भी रज़ामन्दी ज़ाहिर की थी लेकिन कुछ पक्षकारो की रज़ामन्दी नही हो सकी अगर उस पर सहमति हो जाती तो आज का फ़ैसला और बेहतर हो सकता था। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट बनाने का फ़ैसला भी सरहानीय है साथ ही उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि अब मुल्क की बेहतरी की राजनिति के दौर का आगाज़ होगा और साम्प्रदायिकता का अंत होगा।

वहीं दूसरी ओर ऑल इण्डिया तंजीम उलेमा ए इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है वो फैसला ऐतिहासिक है। हम इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। इस फैसले से एक पुराने विवाद का अंत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद के खात्मे पर आज अंतिम मुहर लगा दी है और ये दोनों समुदाय के लिए ख़ुशी का मौका है। उन्होंने कहा कि हमने पहले भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा उसे मुसलमान स्वीकार करेंगे। मुसलमानों ने फैसले को कबूल कर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि अमन कायम रखें।