गुरुद्वारे और मस्जिद से दिया गया कौमी एकता का पैग़ाम

  • मुनीब हुसैन

बरेली। पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुद्वारा की घटना का हिदुंस्तान भर में सिख समुदाय आक्रोश व्यक्त कर रहे । वहीं इस घटना को लेकर सभी धर्मों के लोग सुभाषनगर स्थित पुरवा बब्बन खाँ गुरुद्वारा गुरुनानक दरवार में जमा हुए, साबरी मस्जिद के नमाज़ी भी जौहर की नमाज़ के बाद गुरुद्वारा पहुँचे और घटना की निंदा करते हुऐ भाईचारा बरकरार रखने का संदेश दिया। भारत सरकार व पाकिस्तान सरकार से माँग की, कि आगे कोई ऐसी हरकत न करें जिससे सारी दुनिया में कायम भाईचारे पर आंच आये। पाकिस्तान की ओर से इमरान अली चिश्ती ने सिख भाइयो से माफ़ी मांगने का वीडियो जारी किया हैं, पर पाकिस्तान सरकार को अल्पसंख्यको की सुरक्षा के लिये पुख्ता इंतेज़ाम अमल में लाना चाहिये और समय समय पर कौमी एकता भाईचारे के लिये कदम उठाने चाहिये।

हरजीत सिंह ने पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुद्वारा की घटना पर कड़ी निंदा व्यक्त करते हुये पाकिस्तानी हुकूमत से दोषियों के इस कृत्य हरकत के लिये कड़ी सजा की मांग की ताकि आगे कोई भी शख्स किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुँचा सके और सारी दुनिया में कौमी एकता भाईचारा बना रहे।

जनसेवा टीम के अध्यक्ष पम्मी खान वारसी ने कहा कि

जो क़ौम हर बुरे वक़्त में लोगों के साथ खड़ी रहती है उस क़ौम के गुरुद्वारे पर पत्थर चला रहे जाहिलों पर लानत है, मज़हब हम सबको मोहब्बत की सीख देता हैं नफरत की नहीं, जो नफ़रत फैलाये वो इंसान नहीं शैतान हैं।

जसपाल सिंह बग्गा ने कहा कि

दुनिया की असमाजिक ताकते कितनी भी कोशिश कर ले वो हमारी मोहब्बतो और एकता के आगे फेल हो जाएंगे, पाकिस्तान में जिसने पत्थरबाजी की हरकत की वो किसी मजहब का नहीं हो सकता, मज़हबी लोग तो इंसानियत का पैग़ाम देते हैं।

साबरी मस्जिद के इमाम मौलाना ज़ैनुलआब्दीन ने कहा कि

जो किसी का दिल दुखाये वो हममे से नहीं, पाकिस्तान में जो हरक़त हुई वो शर्मसार हैं उसकी हम मज़म्मत करते हैं।

गजेंद्र सिंह यादव ने कहा कि

पाकिस्तान को मोहब्बत भाईचारा सीखना हैं तो हिंदुस्तानियों से सीखें हमारे मुल्क में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई एक दूसरे के त्यौहार मिलजुलकर मनाते हैं।

इस मौके पर जसपाल सिंह बग्गा, इसराफिल खान राशमी, साहिब सिंह, हरजीत सिंह, बलजीत सिंह, करन सिंह, मांग सिंह, कुलवीर सिंह, अमरजीत सिंह, सोनू सिंह, गजेंद्र सिंह यादव, अहमद उल्लाह वारसी, मौलाना ज़ैनुलआब्दीन, शरीफ़ अहमद, मौलाना नज़ाक़त हुसैन, मुख्तियार खान, सैफ उल्लाह खान, हकीम खान, मोहसिन इरशाद, डॉ सीताराम राजपूत आदि सभी धर्मों के लोग शामिल रहे।