महिला आयोग की सदस्य रश्मि जायसवाल ने सुनी महिलाओं की आपबीती

  • मुनीब हुसैन

बरेली। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा महिलाओं की सुरक्षा बारे किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों के बावजूद भी महिलाओं के विरुद्ध यौन शोषण कम होने का नाम नहीं ले रहे। संभवत: कोई ऐसा क्षेत्र बचा होगा जहां महिलाओं का यौन उत्पीडऩ न हो रहा हो। सर्किट हाउस पहुंची महिला आयोग की सदस्य रश्मि जयसवाल ने ऐसे ही यौन उत्पीड़न के मामले सुने।

इसमें पहला मामला कॉलेज से संबंधित मानसिक व आर्थिक शोषण का रहा। हाल ही में स्प्रिंग डेल महिला महाविद्यालय बिना नोटिस दिए तीन महिला सीनियर प्रोफेसरों को कॉलेज से निकालना चाहते हैं। वहीं तीनों प्रोफेसरो ने कॉलेज प्रबंधन की शिकायत महिला आयोग की सदस्य रश्मि जायसवाल से की। प्रोफेसर डॉ, रेखा सिंह, डॉ शैली सक्सेना व संध्या वार्ष्णेय ने कहा कि कॉलेज प्रबंध हमारी सेवाओं से संतुष्ट होने के साथ जुलाई माह में हमारे वेतन में इंक्रीमेंट भी किया गया था। लेकिन नवंबर माह में नियुक्त निर्देशक सतीश चंद्र ने सभी प्रवक्ताओं के सामने 3 शर्तें रख दी। पहली शर्त वह स्वेच्छा से नौकरी छोड़ रही है। दूसरी व तीसरी शर्त में कहा गया वह 11000 से ₹9000 के बीच में नौकरी करने को तैयार है या अपने प्रमाण पत्र केवल इस महाविद्यालय में ही चलाएंगे। वही यह शर्तें ना मानने पर उनका दिसंबर माह का मानदेय रोक दिया गया। सीपीएफ के भुगतान के साथ उनके उपस्थिति पंजिका पर हाजिरी भी नहीं भरने दी जा रही है अनुपस्थित दर्शायी जा रही है वही प्रोफेसर ने इसकी शिकायत ईमेल व डाक द्वारा की तब भी उनकी सुनवाई नहीं हुई।

वही दूसरा मामला फरीदपुर के सिधवा नखीगंज का था। जिसमें शकुंतला देवी के साथ उनके ससुराली उनके साथ घरेलू हिंसा करते थे। जिसके बाद उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। तीसरा मामला शेरगढ़ के निवासी प्रह्लादपुर गांव की कमला देवी पत्नी कुंवर सिंह का आरोप है कि वह दलित परिवार जिस कारण कुछ विशेष वर्ग के लोग उनको गांव से पलायन करने के लिए धमका रहे हैं। वहीं पुलिस इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं कर रही है।

इस दौरान कार्यवाहक बीएएसए सी देवी, प्रज्ञा वाजपेई, सोनम शर्मा, प्रिंसी सक्सेना, सोनू सिंह, संध्या जयसवाल आदि मौजूद रहे।