मोहर्रम की पहली तारीख को हुआ पहली मजलिस का आयोजन

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शिया तंज़ीमुल मोमिनीन कमेटी के जनरल सेक्रेटरी सय्यद जाबिर ज़ैदी ने कहा की 31 अगस्त को मोहर्रम के चांद की तस्दीक कर ली गई थी लिहाज़ा पहली सितंबर को मोहर्रम की पहली मजलिस हुई।

मजलिस को खिताब करते मौलाना अली असगर

मुज़फ्फरनगर से तशरीफ़ लाये मौलाना अली असगर ने मजलिस को खिताब फरमाया। मौलाना असगर ने कहा की शिया मुसलमान दो महीने आठ दिन शोक मनाते हैं। दो महीने आठ दिनों तक मजलिस ए हुसैन होती रहती हैं। मौलाना असगर ने मोहर्रम और हज़रत इमाम हुसैन की ज़िंदगी पर रोशनी डाली। अंजुमन ज़ुल्फ़िकार ए हैदरी ने नौहा ख्वानी की। यह नौहा खूब पसंद किया गया-

उल्फत हैं मेरी नस्लो पुरानी हुसैन से,

पायी है मेरे खून ने रावानी हुसैन से।

बचपन से मेरी माँ ने सबक़ ये दिया,

मुझे खाना अली से मिलता है पानी हुसैन से।

मजलिस में अनवर आलम, डॉ राजू,जावीद अब्बास,कैफ़ी ज़ैदी, सैफी ज़ैदी, एनफ, हसन आरज़ू, मून, शामू, राजा, आशु, जैन, नवीद, ऑन, जोनी, शानू आदि लोग मौजूद रहे।