रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में एक बड़ा मोड़ आया है। दोनों देशों ने शांति वार्ता के लिए सहमति जताई है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के तहत यह बातचीत जल्द ही शुरू हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे शांति की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया है।
सूत्रों के अनुसार, भारत ने भी इस शांति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के नेताओं से बातचीत की और शांतिपूर्ण समाधान का आग्रह किया। भारत की तटस्थ विदेश नीति की वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि शांति वार्ता का रास्ता आसान नहीं होगा। दोनों पक्षों की मांगें अलग-अलग हैं और कई जटिल मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। लेकिन यह तथ्य कि दोनों देश बातचीत की मेज पर आने को तैयार हैं, अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
