दिल्ली में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक मॉड्यूल को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने महत्वपूर्ण खुलासा किया है. जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल का कथित हैंडलर शब्बीर अहमद लोन है, जिसने अपना ठिकाना बांग्लादेश में बना रखा था और वहीं से भारत में आतंकी गतिविधियों की साजिश रच रहा था. सूत्रों के मुताबिक, शब्बीर अहमद लोन सीधे लश्कर सरगना हाफिज सईद और आतंकी जकी-उर-रहमान लखवी के संपर्क में था. खुलासा किया गया जा रहा है कि आतंकी नेटवर्क के भीतर हाफिज सईद का कोड नेम चाचा जी और लखवी का कोड नेम ताया जी इस्तेमाल किया जाता था.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी गतिविधियों में सक्रियता जांच में यह भी सामने आया है कि शब्बीर को आतंकी गतिविधियों में सक्रिय करने वाला अबु अलकामा था. वर्ष 2005 के आसपास अबु अलकामा ने कथित तौर पर शब्बीर को जिहाद के लिए तैयार किया था. उस समय अबु अलकार्या, हाफिज सईद के करीबी नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया जाता है.
खुफिया सूत्रों के अनुसार, शब्बीर ने बांग्लाराष्ट्र में अपना बेस बना लिया था, लेकिन 2019 में जेल से रिहा होने के बाद वह भारत आता-जाता रहा. जानकारी दी जा रहा है कि वह बांग्लाभारत के हिली बॉर्डर के जरिए आवाजाही करता था. दिल्ली और कोलकाता में लगाए गए भारत-विरोधी पोस्टर इसी मॉड्यूल से जुड़े बताए जा रहे हैं. ये पोस्टर कोलकाता में प्रिंट हुए थे और उनकी पीडीएफ फाइल शब्बीर ने बांग्लादेश से भेजी थी.
बांग्लादेशी नागरिकों को कोलकाता बुलाने की योजना सूत्रों के मुताबिक, शब्बीर के निर्देश पर मॉड्यूल ने कोलकाता के बाहरी इलाके में 8 हजार रुपये प्रति माह किराए पर एक घर लिया था. हथियार खरीदने के लिए शब्बीर ने 80 हजार रुपये से अधिक की रकम भेजी थी और आगे और धनराशि भेजने की स्कीम थी. मॉड्यूल के सदस्य शब्बीर से सिग्नल ऐप के जरिए संपर्क में थे. मालदा का उमर फारुख उससे सबसे ज्यादा बातचीत करता था.
जांच एजेंसियों का दावा है कि शब्बीर तमिलनाडु से पकड़े गए 6 बांग्लादेशी नागरिकों को कोलकाता बुलाने की परियोजना बना रहा था. कथित परियोजना के मुताबिक, आतंकी हमलों को अंजाम देने के बाद इन नागरिकों को बांग्लादेश वापस भेजा जाना था. ISI का सक्रिय नेटवर्क मौजूद खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, बांग्लादेश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का सक्रिय नेटवर्क मौजूद है और वहां कई आतंकी संगठनों ने अपनी जड़ें जमा रखी हैं.
इनमें अंसार बांग्ला टीम (जिसे अल-कायदा से जुड़ा माना जाता है), जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लाहिंदुस्तान (JMB), न्यू JMB (जिसे ISIS से जोड़ा जाता है), इस्लामिक छात्र शिविर जैसे कट्टरपंथी संगठन शामिल बताए जाते हैं. इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी (HUJI) जैसे संगठनों की गतिविधियों पर भी एजेंसियां नजर रखे हुए हैं.
सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं और संभावित आतंकी साजिशों को नाकाम करने के लिए विभिन्न राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी गई है.
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