पिछले सप्ताह देश में एआई इम्पैक्ट सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसी बीच कांग्रेस यूथ कांग्रेस ने सम्मेलन में विरोध प्रदर्शन किया गया।
अब इसको लगभग 160 शिक्षाविदों ने बेहद खेदजनक और नासमझी भरा बताया है। उन्होंने कहा है कि यह विपक्षी दल की वैध लोकतांत्रिक असहमति और वैश्विक मंच पर राष्ट्रीय प्रतिष्ठा की रक्षा करने की अनिवार्यता के बीच अंतर करने में असमर्थता को दर्शाता है। उन्होंने सोमवार को एक संयुक्त बयान में जानकारी दी कि राहुल गांधी से जुड़े विरोध प्रदर्शन ने ऐसे समय में एक दुर्भाग्यपूर्ण धारणा पेश की है, जब वैश्विक निवेशक और प्रौद्योगिकी नेता, एआई और उन्नत प्रौद्योगिकियों में दीर्घकालिक भागीदार के रूप में भारत की विश्वसनीयता का आकलन कर रहे थे।
यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं यह भी पढ़ें- School Bus Fire: तिरुवनंतपुरम में शिक्षण संस्थान बसों में लगी भीषण आग, तीन जलकर राख; साजिश की आशंका के बीच जांच शुरुआत विज्ञापन शीर्ष शिक्षाविदों ने की अलोचन उन्होंने आगे कहा, "संसद सदस्य के रूप में, रचनात्मक लोकतांत्रिक आलोचना और उन कार्यों के बीच अंतर करना संवैधानिक जिम्मेदारी है। जो अनजाने में भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को कमजोर कर सकते हैं।" संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित, आईआईटी रुड़की के निदेशक कमल किशोर पंत, आईआईटी धारवाड़ के निदेशक वेंकप्पैया आर देसाई, आईआईटी जोधपुर के निदेशक अविनाश कुमार अग्रवाल और विभिन्न यूनिवर्सिटीों के कुलपति और प्रोफेसर शामिल थे। जानकारी के अनुसार, घरेलू राजनीतिक प्रचार का स्थान नहीं था विरोध प्रदर्शन के लिए कांग्रेस की आलोचना करते हुए शिक्षाविदों ने कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट एक निर्णायक राष्ट्रीय और सभ्यतागत क्षण है। वहीं, उन्होंने खबर दी कि यह भारत की ओर से दुनिया को स्पष्ट घोषणा थी कि राष्ट्र चौथी औद्योगिक क्रांति के युग में एक गंभीर और संप्रभु टेक्नोलॉजीी शक्ति के रूप में उभरा है।
सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कहा, “इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में इंडियन यूथ कांग्रेस की हालिया विरोध बेहद निंदनीय और नासमझी भरा है। यह न तो कोई पक्षपातपूर्ण मंच था और न ही घरेलू राजनीतिक प्रचार का स्थान।
यह एक अंतरराष्ट्रीय मंच था, जहां भारत दुनिया के सामने अपनी तकनीकी क्षमताओं, रणनीतिक दृष्टि और राष्ट्रीय क्षमता का प्रदर्शन कर रहा था।” उन्होंने आगे ब्योरा दी, "ऐसे क्षण को राजनीतिक प्रदर्शन के अवसर में बदलना गंभीर रूप से निर्णयहीनता और वैध लोकतांत्रिक असहमति तथा वैश्विक मंच पर राष्ट्रीय प्रतिष्ठा की रक्षा करने की अनिवार्यता के बीच अंतर करने में असमर्थता को दर्शाता है।" यह भी पढ़ें- Kerala: केरल विधानसभा में सबरीमाला सोना चोरी विवाद पर घमासान, UDF ने सदन चलाने में सहयोग न करने का किया गया एलान शिक्षाविदों ने यह भी कहा कि यह चिंताजनक है कि कांग्रेस द्वारा अपनाया गया दृष्टिकोण इतने महत्वपूर्ण वैश्विक जुड़ाव के दौरान व्यापक राष्ट्रीय हित को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करता है। उन्होंने सूचना दी, "ऐसे समय में जब चीन और पाकिस्तान जैसे विरोधी देश सार्वजनिक रूप से शिखर सम्मेलन के महत्व पर सवाल उठाते हैं । या उसे कम करने की कोशिश करते हैं, तो कोई भी घरेलू राजनीतिक आचरण जो इन कथनों को मजबूत करता प्रतीत होता है, गंभीर जांच का पात्र है।" उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन हिंदुस्तान के तकनीकी आत्मविश्वास और स्वराष्ट्री आधारभूत मॉडल विकसित करने, वैश्विक पूंजी आकर्षित करने, नैतिक शासन ढांचे को आकार देने और उद्योग 4.0 में एक निर्णायक आवाज के रूप में उभरने की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा का स्पष्ट प्रदर्शन था।
शिक्षाविदों ने यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में हिंदुस्तान की प्रगति उसके वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों, संस्थानों, विश्वविद्यालयों और नीतिगत ढांचों का सामूहिक परिणाम है।
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