झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने ईडी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोरेन ने केस रद्द करने और बार-बार भेजे जा रहे समन को चुनौती दी थी।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। इसके तहत सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। इतना ही नहीं मामले में कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने दिया। यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं बता दें कि सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ दर्ज केस को रद्द करने की मांग की थी।
साथ ही उन्होंने ईडी की ओर से बार-बार जारी किए जा रहे समन (तलब करने के नोटिस) को भी चुनौती दी है। विज्ञापन ये भी पढ़ें:- Assam: गौरव गोगोई इंडिया-फिलीपींस संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष के लिए नामित, असम सीएम ने कसा तंज क्या है पूरा केस, समझिए दरअसल, झारखंड हाई कोर्ट ने 15 जनवरी को सोरेन को राहत देने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने उस आदेश को रद्द करने से मना कर दिया था, जिसमें विशेष सांसद-विधायक (एमपी-एमएलए) अदालत ने ईडी की शिकायत पर उनके खिलाफ संज्ञान लिया था।
इसे सोरेन के लिए महत्वपूर्ण झटका माना गया था। ये भी पढ़ें:- तेज रफ्तार थार का कहर: गोवा घूमने गया परिवार हादसे का शिकार, 65 वर्षीय पर्यटक की मौत, बाल-बाल बचा नवजात ईडी ने सोरेन के खिलाफ दर्ज की थी शिकायत इसके बाद ईडी ने सोरेन के खिलाफ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शिकायत दर्ज की है। एजेंसी का आरोप है कि समन भेजे जाने के बावजूद वह पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए।
ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आभारत के बाद निचली अदालत में चल रही सुनवाई फिलहाल रुकी रहेगी। आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ईडी का पक्ष सुनने के बाद अगला फैसला करेगा। टेरर फंडिंग मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अलगाववादी शब्बीर शाह के भाषणों का जिक्र करने पर एनआईए से पूछे सवाल सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एनआईए से सवाल किया कि उसने टेरर फंडिंग मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका का विरोध करते हुए 1990 के दशक के कुछ कथित भड़काऊ भाषणों का हवाला क्यों दिया।राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ को खुलासा किया कि शाह के खिलाफ भड़काऊ वीडियो और आपत्तिजनक ई-मेल सहित कई सामग्रियां मौजूद हैं।
जब एनआईए की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने वीडियो के कुछ ट्रांसक्रिप्ट का हवाला दिया, तो बेंच ने भाषणों की तारीख के बारे में पूछा। लूथरा ने खुलासा किया कि एजेंसी के पास कुछ वीडियो की तारीखें थीं और वे 1990 के दशक के थे। पीठ ने कहा है कि ये भाषण कोई नई रचना नहीं हैं। ये तो 30 या 35 साल पहले से ही मौजूद थे।
अब आप इन्हें 2019 में निकालकर भड़काऊ भाषण बता रहे हैं। दरअसल, लूथरा ने कहा कि शाह के घर की तलाशी के दौरान उनके परिसर से भड़काऊ वीडियो बरामद हुए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि शाह के खिलाफ गवाहों के बयान भी मौजूद हैं। पीठ ने लूथरा से मामले की सुनवाई के चरण के बारे में पूछा।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने निचली अदालत के 19 फरवरी के आराष्ट्र का हवाला देते हुए कहा कि 34 गवाहों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अब मुकदमे की सुनवाई के दौरान संरक्षित गवाहों से पूछताछ की जाएगी। एनआईए द्वारा प्रस्तुत दलीलों को सुनने वाली पीठ ने मामले को 12 मार्च के लिए स्थगित कर दिया, जब शाह का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस अपनी प्रतिवाद दलीलें पेश करेंगे।
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