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Gen Naravane: पूर्व थल सेना प्रमुख बोले- प्रशासन को सेना पर पूरा भरोसा, फौज को अभियान के दौरान मिलती है पूरी छूट

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देश के पूर्व थल सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी नई किताब, सेना की भूमिका, चीन-पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक सुरक्षा हालात पर अपनी राय रखी। इंटरव्यू में जनरल नरवणे ने 'फोर स्टार डेस्टिनी' को लेकर हुए विवाद पर खुलकर बात की। गौरतलब है कि विस्तार से पढ़ें जनरल नरवणे का साक्षात्कार…

सवाल : आपकी पहली किताब फिक्शन पर आधारित थी, जिसे नागरिकों ने काफी पसंद किया। अब आपकी नई किताब 'द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ एंड मिस्ट्रीज' नॉन-फिक्शन है। इस विषय पर लिखने का विचार कैसे आया? विज्ञापन जवाब : इस किताब में कुल 25 चैप्टर हैं और हर चैप्टर अपने आप में एक अलग कहानी है।

इस किताब को लिखने का विचार मुझे तब आया, जब मैंने शशि थरूर की किताब 'ए वंडरलैंड ऑफ वर्ड्स: अराउंड द वर्ड इन 101 एसेज' पढ़ी। दरअसल, यह किताब अंग्रेज़ी भाषा, शब्दों और उनके कॉन्सेप्ट्स पर आधारित है।

उसे पढ़ने के बाद मेरे मन में आया कि क्यों न मैं भी ऐसी किताब लिखूं, लेकिन फौज से जुड़ी उन अनजानी और दिलचस्प बातों पर, जिनके बारे में आम लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होती। बस वहीं से इस किताब की शुरुआत हुई। सवाल : इस किताब में आपका सबसे पसंदीदा चैप्टर कौन सा है? जवाब : मेरा सबसे पसंदीदा चैप्टर है 'चक दे फट्टे'।

यह मेरे रेजिमेंट का एक नारा भी है। चाहे खेल-कूद हो या एक-दूसरे का हौसला बढ़ाना हो, उस वक्त हम 'चक दे फट्टे' कहते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आजकल यह शब्द काफी लोकप्रिय हो गया है। इस पर फिल्म भी बनी और आम जनता भी इसका इस्तेमाल करते हैं।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह शब्द आया कहां से है। दरअसल, इसका इतिहास सिखों और मुगलों के बीच हुई लड़ाइयों से जुड़ा है। इस बीच, जब सिख सेना मुगलों के कैंप पर हमला करती थी, तो वापसी के समयावधि रास्ते में बने लकड़ी के पुलों के फट्टे उखाड़ लेती थी। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि मुगल सेना उनका पीछा न कर सके।

इसी दौरान वे एक-दूसरे से कहते थे, "चक दे फट्टे," यानी काम पूरा हो गया। यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है, जिसके बारे में बहुत कम जनता जानते हैं। मेरी किताब के सभी चैप्टर इसी तरह के फौजी इतिहास से जुड़े हैं। सवाल : आपकी किताब 'फोर स्टार डेस्टिनी' प्रकाशित नहीं हुई, लेकिन वह विवादों में आ गई।

राहुल गांधी उसे संसद में लेकर आए। क्या आप मानते हैं कि वह किताब प्रमाणिक थी? जवाब : एक लेखक के तौर पर मैं यही कहूंगा कि मैंने उस किताब की फाइनल कॉपी खुद नहीं देखी है।

वहीं, वह कौन सी किताब थी, खबर दीं से आई, उसके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। इस बीच, प्रकाशक ने भी साफ कहा है है कि इस किताब की कोई कॉपी आधिकारिक रूप से सर्कुलेशन में नहीं है। ऐसे में जो भी बाहर आया, वह खबर दीं से आया, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।

सवाल : उस किताब की एक लाइन, 'जो उचित समझो, वो करो,' पर काफी विवाद हो गया। वहीं, क्या इस लाइन का गलत मतलब निकाला गया? जवाब : फौज को ऑपरेशन के दौरान पूरी छूट दी जाती है।

इसका मतलब यह होता है कि सरकार को सेना पर पूरा भरोसा है। इस बात को उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।

लेकिन अगर कोई हर चीज को गलत तरीके से देखना चाहता है, जैसे कि (ग्लास आधा खाली है या आधा भरा), तो फिर मैं क्या ही बोलूं। सवाल : सेना के नाम पर राजनीति करने वालों को आप क्या कहना चाहेंगे?

क्या इससे सेना का मनोबल प्रभावित होता है? जवाब : मैं नहीं मानता कि सेना को राजनीति में लाया जा रहा है। देशीय सेना और बाकी सशस्त्र बल पूरी तरह से गैर-राजनीतिक हैं।

राजनीतिक नेतृत्व के आराष्ट्र का पालन करना सेना का कर्तव्य है। सूत्रों के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि सेना राजनीतिक हो गई।

जैसे अगर मैं अपने जूनियर को कोई आदेश देता हूं, तो उसका पालन करना उसका फर्ज है। उसी तरह, आर्मी चीफ के रूप में मेरा सीनियर रक्षा मंत्री होता है। अगर रक्षा मंत्री कोई आभारत देते हैं, तो सेना उसे मानती है। वहीं, इसका यह मतलब नहीं कि सेना राजनीति में शामिल हो गई है।

दोनों चीजों में स्पष्ट अंतर है। सवाल : चीन सीमा पर भारतीय सेना ने चीनियों को कैसा जवाब दिया था?

क्या हिंदुस्तान चीन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है? जवाब : जब भी कोई सैन्य कार्रवाई होती है, तो वह पूरे देश का प्रयास होता है। यह सिर्फ सेना या किसी एक संगठन का गतिविधि नहीं होता।

बता दें कि हमने एकजुट होकर कार्रवाई की, इसलिए हम सफल हुए। हमारी कार्रवाई के कारण ही पीएलए को पीछे हटना पड़ा। दरअसल, हमने चीन को पीछे हटने के लिए मजबूर किया गया।

अगर यह जीत नहीं है, तो और क्या है? और अगर नागरिक इसे भी स्वीकार नहीं करना चाहते, तो फिर मैं कुछ नहीं कह सकता। सवाल : ऑपरेशन सिंदूर को एक साल होने वाला है।

यह खबर स्वचालित रूप से संकलित की गई है।

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