इमाम बाकिर की यौमे विलादत पर आयोजित मुशायरे में शायरों ने कलाम पेश किये

  • मुनीब हुसैन

बरेली। ज़खीरा स्थित डॉ अकील ज़ैदी के इमामबाड़ा में हजरत इमाम मोहम्मद बाकिर अलैह. की यौमे विलादत पर एक तरही महफिल नबी का नाम, नबी का जवाब बाकिर है का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।

महफिल का आगाज मौलाना सितवत हैदर ने तिलावते ए कुरान पाक से किया। महफिल में कई मुकामी शायरों ने भी अपने कलाम से मौला की खिदमत में नज़राना ए अकीदत पेश किये,। मोहिब सेंथली ने पढ़ा

ये ही अक़ीदा मिरा और यही मेरा ईमान

इमाम पांचवे आली जनाब बाक़िर है

गुलरेज तुराबी ने पढ़ा

सवाल ये नही जन्नत में कौन जाऐगा,

सवाल ये है कि किस-किस का ख्वाब बाक़िर है

सदफ मुरादाबादी का यह कलाम भी खूब सराहा गया

यह बात माननी होगी अक़ील भाई की

नबी का नाम नबी का जवाब बाक़िर है।

अदील बरेलवी ने

किसी ने पूछा अगर क्या जनाब बाकिर है,

मेरा जवाब यह है लाजवाब बाकिर है।

पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। हुनर फरुखाबादी ने पढ़ा

पढे जो दिल से तो ईमान दस गुनाह हो जाऐ,

शहीदे करबोबला कि किताब बाकिर है।

ज़ीशान हैदर बरेलवी के इस कलाम को भी खूब दाद मिली

नबी से कुल्लोना सुन के यह कह राहा हूं मै,

नबी का नाम नबी का जवाब बाक़िर है।

डॉ अक़ील ज़ैदी सेंथली का अशआर

बहार बन के ये दोनों जहांन पर छाऐ,

नबी की नस्ल पा ऐसा गुलाब बाक़िर है।

को भी खूब सराहा गया। इस दौरान अली अलिम, रिजवान, मोनिस, मुन्ना, हनी बरेलवी, शाद फरूखाबादी आदि ने भी अपने कलाम पेश किये।

महफिल की निजामत हलीम सेंथली ने की। उन्होनें अपने अशआर पर खूब वाह वाही लूटी। महफ़िल का समापन इमामे जुमा शमसुल हसन खां ने इमाम बाक़िर की ज़िदगी पर रौशनी डालकर किया। महफिल में यासीन फुज़ैल, दानिश, मोनिस, असलम एजाज, असद जैदी, जुल्फिकार, अल्वी, राहत ज़ैदी, नबील, लखते हैदर, काशान, अली हाशिम, अली आलिम आदि लोग मौजूद रहे।

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